एक चोरी पकड़ी गई और आसमान से जमीन पर...


संपादकीय
11 अगस्त
अमरीका में भारतीय मूल के सबसे बड़े पत्रकार फरीद जकारिया एक बड़ी शर्मनाक बात में फंस गए हैं। दुनिया की सबसे प्रमुख समाचार पत्रिका टाईम में उनके कॉलम, और सीएनएन समाचार चैनल पर उनके खास कार्यक्रम को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने अपने एक कॉलम में कुछ बरस पहले के एक लेख के बहुत से हिस्से, ज्यों के त्यों चोरी करके छाप लिए, और यह बात उन्हें पढऩे और देखने-सुनने वालों को सदमा पहुंचाने वाली थी। उन्होंने इसे अपनी गलती बताते हुए इसके लिए माफी मांगी है। मीडिया ने यह चोरी पूरे खुलासे से आ गई है और यह बात सदमा पहुंचाने वाली है कि इतना बड़ा एक पत्रकार अपने एक कॉलम के लिए पहले से एक बड़ी पत्रिका में छपे हुए लेख के इतने सारे हिस्से कैसे चुरा सकता है? 
फरीद जकारिया की अहमियत उनके अपनी काम की वजह से भी थी, और पिछले बरसों में अमरीका के भीतर अमरीकी समझ वाले एक बड़े मुस्लिम पत्रकार होने की वजह से भी थी। उनकी कही हुई बात, उनकी लिखी हुई बात एक मुस्लिम पत्रकार के रूप में भी देखी जाती थी, चाहे उनके मजहब का उनके कहे-लिखे से कोई लेना-देना रहा हो, या न रहा हो। मुस्लिम देशों पर अपने हमलों के चलते हुए अमरीका को इस किस्म की एक जरूरत भी थी कि वहां के कुछ प्रमुख मुस्लिम समाज के सामने अपनी बात रख सकें। पाठकों की जानकारी के लिए फरीद जकारिया भारत के एक राजनेता और इस्लामिक विषयों के विद्वान रफीक जकारिया के बेटे हैं और भारत के स्वंत्रता आंदोलन में भी ये सक्रिय रहे। भारत के मामलों पर उनकी कोई डेढ़ दर्जन किताबें बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। फरीद जकारिया की मां फातिमा जकारिया भी भारत में टाईम्स ऑफ इंडिया में अखबारनवीस रही हैं। फरीद जकारिया की भी लिखी हुई कई किताबें अमरीका में, और वहां से बाहर भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। 
आज यहां लिखने का मकसद, एक ऐसे पत्रकार के बारे में लिखना नहीं है जिसका भारत के लोगों के लिए सीधा-सीधा कोई महत्व नहीं है। बल्कि इस हादसे के बारे में लिखना है जिसने आसमान से उखाड़कर एक बहुत कामयाब नौजवान को जमीन पर पटक दिया। इस मामले से एक यह सबक लेने की जरूरत रहती है कि एक गलती किसी पर कितनी भारी पड़ सकती है। आज का जमाना कम्प्यूटर, इंटरनेट और तरह-तरह की इंटरनेट-खोज का है। लोग की बात की बात में किसी भी तरह की चोरी को पकड़ लेते हैं। हमारे ही दफ्तर में बहुत से लोग हिन्दी या अंग्रेजी में छपने के लिए अपना लिखा बताते हुए भेजते हैं, और उसके कुछ खास शब्दों से यह तलाश लेना मुश्किल नहीं होता कि वह पहले छप चुका है या नहीं। जब तक कोई चीज इंटरनेट पर नहीं आती, तभी तक वह नकल की जा सकती है। टेक्नालॉजी के इसी खतरे को देखते हुए ओसामा-बिन-लादेन ने फरारी के अपने एक पूरे दशक में फोन या इंटरनेट का इस्तेमाल ही शायद नहीं किया था।
लेकिन टेक्नालॉजी से परे यह बात भी समझने की जरूरत है कि वक्ती तौर पर वाहवाही पाने के लिए अगर कोई चोरी करके अपने नाम से कुछ छपवाते हैं, या फिल्म-कला का कोई काम करते हैं, तो उनके इस गलत काम से उनका पहले का किया हुआ सारा मौलिक काम, बिना चोरी का काम भी इज्जत खो बैठता है। इस बात को अपने बच्चों को बचपन से ही बताने की जरूरत है क्योंकि आजकल पढ़ाई-लिखाई से लेकर स्कूल के प्रोजेक्ट तक लोगों में चुराकर रख देने की सहूलियत बढ़ती जा रही है। ऐसे में कट एंड पेस्ट कहे जाने वाले आसान काम का इस्तेमाल स्कूल की क्राफ्ट फाईल से लेकर पीएचडी की थीसिस तक धड़ल्ले से होता है। लेकिन ऐसी ही चोरी का शक होने पर उसमें से कुछ शब्दों को उठाकर अगर सर्च किया जाए तो इंटरनेट पल भर में बता देता है कि चोरी कहां से हुई। 
यह बात भी मायने रखती है कि जो लोग मौलिक लिखने, या मौलिक काम करने  के बजाय चोरी में जुट जाते हैं, धीरे-धीरे उनका दिमाग और उनकी कल्पना शक्ति काम करना कम कर देते हैं। यह कुदरत का किया हुआ इंतजाम है कि इंसानी शरीर में जिन चीजों का इस्तेमाल कम रह जाता है, कुदरत उसे धीरे-धीरे घटाते चलती है। इसलिए आज इस मुद्दे पर लिखना हम महत्वपूर्ण समझ रहे हैं कि चोरी से बचने में ही समझदारी है, क्योंकि चोरी का छुपना अब नामुमकिन है। और पकड़े जाने पर आसमान से सीधे जमीन पर पटके जाते हैं। 


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