सत्ता की बददिमागी लोगों के लिए आत्मघाती होती है

संपादकीय
11 अगस्त 2017


हरियाणा के भाजपाध्यक्ष का बेटा दारू के नशे में साथियों के साथ कार में एक  लड़की का पीछा करने और उसके अपहरण की कोशिश में गिरफ्तार है, और हरियाणा के मुख्यमंत्री की शुरुआती प्रतिक्रिया मुजरिम दिखते शराबी नौजवान के खिलाफ होने के बजाय उसके पिता को बेकसूर ठहराने वाली सामने आई है। यह बात अपनी जगह सही है कि किसी बालिग औलाद के लिए मां-बाप जिम्मेदार नहीं होते, लेकिन यह बात भी सही है कि संविधान की शपथ लेकर सरकार चलाने वाले किसी इंसान को मुजरिम को सजा दिलाने की बात कहनी चाहिए, उसे बचाने वाली नहीं।
लेकिन यह बचाना बड़ा आम हो चुका है। देश में जगह-जगह कई पार्टियों के लोग अपने नेताओं को, और अपने कुनबों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाते हैं। पड़ोस के मध्यप्रदेश को ही देखें, तो वहां वेश्याएं मुहैया कराने के सेक्स-कारोबार में फंसे हुए और गिरफ्तार हुए भाजपा नेता से लेकर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करते गिरफ्तार भाजपा नेताओं तक एक लंबा सिलसिला सामने आया है, लेकिन भाजपा ने अपने इन कुलकलंकों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा है। ऐसा न कहना उनको बचाने सरीखा है। दूसरी तरफ अगर ये काम करने वाले कोई मुस्लिम होते, तो उन्हें मध्यप्रदेश के भाजपा नेता कूद-कूदकर पीटते और देशद्रोही करार देते, भारत की संस्कृति तबाह करने वाला बताते। लेकिन गोमांस बेचने वाले भी कुछ लोग भाजपा के निकले हैं, कुछ लोग नकली नोट छापने और चलाने वाले भी निकले हैं, लेकिन पार्टी ने इनके खिलाफ कुछ नहीं कहा। मोटेतौर पर यही हाल बाकी पार्टियों का है, और ऐसे में यह देखकर हैरानी होती है कि किस तरह सीपीएम ने बंगाल में अपने एक नेता को इसलिए निलंबित कर दिया कि वह एक महंगा मोबाइल इस्तेमाल करता था। आज तो बाकी किसी भी पार्टी में लोग लाखों-करोड़ों की घडिय़ां पहनकर घूमें तो भी उनकी पार्टी को उससे कोई दिक्कत नहीं होती, वे एयरपोर्ट या दूसरी जगहों पर सरकारी कर्मचारियों को पीटें तो भी उनको कोई दिक्कत नहीं होती है।
ऐसी बददिमागी, गुंडागर्दी, और जुर्म के लिए जो हौसला सत्ता से मिलता है, वही हौसला लोगों को तबाही तक ले जाता है। पूरे देश में जगह-जगह राजनीतिक दलों के नेताओं ने भ्रष्टाचार की छूट मिलने को इतने बड़े-बड़े भ्रष्टाचार किए कि वे उनकी अगली पूरी सदी की राजनीतिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों से अधिक की दौलत और जायदाद जुटाने वाले रहे, और उसी चक्कर में वे जेल भी पहुंच गए, सजा भी काट रहे हैं। जिस चौटाला कुनबे की अरबों-खरबों की दौलत है, उसके मुख्यमंत्री रहे हुए मुखिया जेल में सजा काट रहे हैं, तमिलनाडू की शशिकला कर्नाटक की जेल में बंद हैं। राजनीति में भ्रष्ट पैसे की कुछ जरूरत तो हो सकती है, अगर ईमानदारी से चुनाव लडऩे का हौसला न हो तो। लेकिन ऐसी मजबूरी किसी की नहीं रहती। ऐसे में सत्ता की बददिमागी सिर चढ़कर बोलती है, और मां-बाप भ्रष्ट रहते हैं, आल-औलाद गुंडागर्दी पर उतर आती है, और सौ में से चाहे एक ही सही, सारी ताकत के बावजूद जेल की कैद तक पहुंच ही जाते हैं। अगली सौ पीढ़ी के लिए जमा की गई दौलत धरी रह जाती है, और एक मामले में पुख्ता सुबूत, ईमानदार जज आ जाने से वह पूरी दौलत किसी ताकत की नहीं रह जाती।
जो लोग सत्ता की ताकत से जुर्म करते चलते हैं, उनको याद रखना चाहिए कि अगर कानून एक बार भी ठीक से काम कर बैठा हो, तो वे कहीं के नहीं रह जाएंगे। लेकिन सत्ता से ऐसी बददिमागी आती है कि लोगों को यह लगता ही नहीं कि उनके बुरे दिन भी कभी आ सकते हैं, कभी उनके मामलों पर कार्रवाई करने वालों अफसर या जज ईमानदार भी निकल सकते हैं, या कि कोई ऐसे गवाह भी हो सकते हैं जिन्हें धमकाना या खरीदना मुमकिन न हो। मध्यप्रदेश में सत्ता की सारी ताकत मिलकर भी व्यापम घोटाला फूटने से रोक नहीं पाई। सत्ता के कई लोग सरकार की लाख कोशिश के बावजूद जेल चले गए, हालांकि सत्ता से जुड़ी रहस्यमय ताकतों की इतनी कामयाबी तो सामने आई कि इस मामले से जुड़े हुए पचास लोग अब तक रहस्यमय तरीके से मर चुके हैं, या कि मार डाले गए हैं। इस पूरे सिलसिले से हम केवल यही एक नतीजा निकालना चाहते हैं कि सत्ता की बददिमागी लोगों के लिए आत्मघाती साबित होती है।

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