सरकारी अनुदान पर गायों को ऐसी मौत कोई और देता तो?

संपादकीय
19 अगस्त 2017


छत्तीसगढ़ में एक भाजपा नेता और म्युनिसिपल में निर्वाचित पद पर बैठे हुए स्थानीय मुखिया की गौशाला में पिछले दो-चार दिनों में दर्जनों गायों की बहुत ही बुरी हालत में मौत पाई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो सौ से अधिक गायें मारी गई हैं क्योंकि उन्हें खाना भी नहीं मिला। जब थोक में इतनी मौतें हो गई हैं, और इतनी लाशों को ठिकाने लगाना मुमकिन नहीं था, तो गौसेवा आयोग ने पुलिस रिपोर्ट की, और यह भाजपा नेता गिरफ्तार किया गया। अब जानकारी सामने आ रही है कि इसकी गौशाला को पिछले पांच बरस में करीब एक करोड़ रूपए का सरकारी अनुदान मिला था, और अनुदान के बेजा इस्तेमाल से लेकर गायों की बदहाली तक के लिए इसे सरकारी नोटिस मिलते रहे। यह सब भाजपा का एक हिन्दू नेता करते रहा, और इसके बाद जगह-जगह से खबरें आ रही हैं कि किस तरह सरकारी अनुदान पर गौशाला चलाकर हिन्दू नेता कमाई कर रहे हैं, और उनकी गऊमाता भूखों मर रही है।
यह मामला भयानक इसलिए भी है कि देश भर में जगह-जगह दो-चार गायों को लेकर भी दलितों और अल्पसंख्यकों को पीट-पीटकर मार डाला गया है, और देश में कुछ ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि इसमें इंसानों के रहने की गुंजाइश चाहे न बचे, गायों का बाल भी बांका नहीं होना चाहिए। ऐसे में जब शहरी घूरों पर जगह-जगह गायें गंदगी, मैला, और प्लास्टिक का कचरा खाते दिखती हैं, तो लगता है कि उनकी वो राष्ट्रवादी संतानें कहां हैं जिन्हें गाय की निकलती हुई सांस में भी ऑक्सीजन दिखता है, गोमूत्र में सोना दिखता है, गोबर में रेडियो एक्टिविटी रोकने की ताकत दिखती है, और इन सबमें कैंसर का इलाज दिखता है? गाय के नाम पर साम्प्रदायिक और हिंसक राजनीति करने वाले तब क्या करते जब छत्तीसगढ़ की इस गौशाला में हुई सैकड़ों मौतों के पीछे कोई गैरहिन्दू, कोई दलित या कोई अल्पसंख्यक जिम्मेदार होता?
यहां दो बिल्कुल अलग-अलग बातें हैं। एक तो गाय को लेकर देश में जो साम्प्रदायिक उन्माद फैलाया जा रहा है, उसे जिस तरह राष्ट्रवाद से जोड़ा जा रहा है, और उसे लेकर जिस तरह की अवैज्ञानिक बातें फैलाई जा रही हैं, उन्हें वैज्ञानिक सच ठहराया जा रहा है, वह सब अपने आपमें बड़ी फिक्र का सामान है। अब उसके साथ-साथ यह भी है कि छत्तीसगढ़ में सरकारी अनुदान से सैकड़ों करोड़ रूपए लेकर गौशाला चलाने वालों ने अपनी संतानों के लिए कई पीढिय़ों का भ्रष्टाचार जमा कर लिया, और गाय की कई पीढिय़ों को मार डाला। बिहार में नीतीश-भाजपा गठबंधन सरकार के वक्त भाजपा के नेताओं ने सृजन नाम के एनजीओ के नाम पर सरकारी खजाने से करीब हजार करोड़ रूपए पार कर दिए, और अब वे लोग फरार हैं। लेकिन उसमें कम से कम किसी गाय का नाम नहीं था, इसलिए भाजपा के उन नेताओं ने कोई राष्ट्रद्रोह नहीं किया था, गऊमाता का कोई निवाला नहीं छीना था, महज गरीब जनता के खजाने के हजार करोड़ रूपए पार कर दिए थे। लेकिन छत्तीसगढ़ में तो इन हिन्दू नेताओं ने गाय पालने की गौशाला के नाम पर जगह-जगह फर्जीवाड़ा किया, और गाय को भूखे मार डाला। यह अनुदान देने वाला छत्तीसगढ़ सरकार का पशुपालन विभाग है जिसके मंत्री बृजमोहन अग्रवाल अभी इजराइल के दौरे से ऐसी गौशालाओं पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भेज रहे हैं। लेकिन उनके विभाग से बंटने वाले ऐसे अनुदान पाकर भयानक भ्रष्टाचार करने की शिकायतें तो खुद विभाग की जांच में बरसों से साबित होती रही हैं, और इस पर अगर उन्होंने कार्रवाई की होती, तो उसके बाद से अब तक ऐसी हजारों गायों को भूखे और बीमार नहीं मरना पड़ता। बृजमोहन अग्रवाल से यह उम्मीद इसलिए भी की जाती थी कि उनके पिता पूरी जिंदगी से राजधानी रायपुर की एक सबसे बड़ी गौशाला से जुड़े हुए हैं। हमने इसी अखबार में गौशालाओं को सरकारी अनुदान में करोड़ों के घोटाले की रिपोर्ट एक-दो बरस पहले ही सरकारी जांच के हवाले से छापी थी, लेकिन जाहिर है कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज जब यह बात लिखी जा रही है, तब इजराइल के प्रवास से कृषि एवं पशुपालन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का भेजा समाचार मिला है कि वे वहां पर अत्याधुनिक डेयरी देख रहे हैं। उन्हें वहां से यह भी देखकर लौटना चाहिए कि बिना खाना दिए गायों को किस तरह जिंदा रखा जा सकता है, ताकि छत्तीसगढ़ में उनकी सरकार की बदनामी न हो।
सैकड़ों गायों की लाशों का हिसाब अब सामने आ रहा है, और छत्तीसगढ़ के टीवी चैनलों पर भयानक तस्वीरें दिख रही हैं कि किस तरह ट्रैक्टर ट्रॉली भर-भरकर लाशों को छुपाया गया है। ऐसे एक गौशाला संचालक को गिरफ्तार करना काफी नहीं है, और राज्य सरकार ने सभी जिलों में गौशाला की जांच का जो आदेश दिया है, उस पर अगर ईमानदार रिपोर्ट आएगी, तो दर्जनों लोग सरकारी अनुदान में अफरा-तफरी के जुर्म में गिरफ्तार हो जाएंगे। दूसरी तरफ जिन गौभक्तों को गाय में ईश्वर दिखते हैं, उनको गाय या ईश्वर से यह सवाल भी करना चाहिए कि गाय को भूखे मारने वाले लोगों को क्या कोई सजा मिलेगी? या फिर गाय की जिंदगी महज घूरों पर ही गुजरेगी? एक अखबार में यह भी लिखा हुआ है कि गौशाला घोटाला करने वाला यह भाजपा नेता मरी गाय की खाल को मछलियों की चारे की तरह इस्तेमाल करता था, और तालाब में डालता था। देश भर में दलितों और अल्पसंख्यकों को जितने तरह की गौ-हिंसा के लिए जवाबदेह ठहराया जा रहा है, उसमें कई नई मौलिक किस्में छत्तीसगढ़ में जुड़ रही हैं, और राज्य सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग गायों को ऐसा भूखा मारने की रिपोर्ट पढ़ते हुए क्या खुद खाना खा सकेंगे?
आज देश भर में गाय को लेकर जिस तरह का अवैज्ञानिक और हिंसक-साम्प्रदायिक उन्माद फैलाया जा रहा है, केन्द्र और राज्य तरह-तरह के कानून बना रहे हैं, उन सबको लेकर देश की खेती से पशुओं का खात्मा हो रहा है। अब कोई किसान जानवर पालने की हिम्मत नहीं कर पाएंगे, और छोटे-छोटे डेयरी वाले भी डर-सहमकर अपने कारोबार बदल देंगे। तो क्या यह पूरा गौ-उन्माद डेयरी के अरबपति-खरबपति कारोबार को बढ़ावा देने का एक हथियार भी है? ऐसी कई बातें मन में उठती हैं क्योंकि गौ-उन्माद में बनाए गए कानूनों से देश में करोड़ों लोगों का पशु आधारित रोजगार खत्म हो चुका है जिसमें डेयरी से लेकर खेती तक, और चमड़े से लेकर हड्डियों तक का कारोबार है। गाय-भैंस के मांस का कारोबार आज देश के खरबपति कारखानों में धड़ल्ले से जारी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उसे जुर्म बनाकर खत्म कर दिया गया है। इस तरह यह धार्मिक और साम्प्रदायिक उन्माद करोड़ों के रोजगार छीनकर कुछ सौ लोगों को अरबपति बनाने का एक अभियान भी साबित हो रहा है। 

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