आस्था को हथियार बनाकर शक्तिप्रदर्शन, कुचला जाए

संपादकीय
23 अगस्त 2017


हरियाणा में एक संप्रदाय के गुरू गुरमीत राम रहीम के खिलाफ चल रहे एक बलात्कार-मामले में सीबीआई अदालत का फैसला आने जा रहा है, और दो दिन बाद आने वाले इस फैसले के मौके पर उनका साथ देने के लिए उनके भक्त और अनुयायी लाखों की संख्या में चंडीगढ़ पहुंचने की आशंका है। इसे देखते हुए राज्य सरकार की मांग पर केंद्र ने सीआरपीएफ के दस हजार जवान भेजे हैं। सरकारी एजेंसियों को यह आशंका है कि डेरा सच्चा सौदा नाम के इस संप्रदाय के अनुयायियों ने पंजाब, हरियाणा के इलाकों में हथियार और पेट्रोल इक_ा कर रखे हैं, और उनके गुरू को सजा होने की स्थिति में वे बड़े पैमाने पर हिंसा और तोडफ़ोड़ कर सकते हैं, हालत इतने तनाव से भरी है कि लोगों ने शादियां भी आगे बढ़ा दी हैं कि इस फैसले से कोई तनाव पैदा हो तो शादी बर्बाद न हो। यह मामला 2007 से चल रहा है, और गुरमीत राम रहीम पर उन्हीं की एक पूर्व महिला अनुयायी ने डेरा शिविर में कई बार बलात्कार की रिपोर्ट लिखाई थी।
लोगों को याद होगा कि बलात्कार के ही एक आरोप में बरसों से जेल में कैद और जमानत का हकदार न माना जाने वाला आसाराम जब-जब अदालत लाया जाता है, तब-तब उसके अनुयायी वहां पहुंचकर सड़कों पर उत्पात करते हैं, अदालत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश करते हैं, और अपने गुरू का हौसला बढ़ाते हैं। इसी तरह की नौबत कई धर्मों और संप्रदायों के गुरूओं के जुर्म में सामने आती हैं, जहां कानून और पुलिस के लिए बड़ी दिक्कत खड़ी होती है। गुरमीत राम रहीम के अनुयायियों में बड़ी संख्या में दलित हैं, और पंजाब-हरियाणा के इलाकों में उनका खासा असर माना जाता है। सिख धर्म के गुरूओं जैसी पोशाक पहनकर वह पहले भी तनाव खड़ा कर चुका है और बाद में इसके लिए उसे सिखों से माफी भी मांगनी पड़ी थी।
लोकतंत्र में कानून और आस्था के बीच टकराव की बहुत सी नौबतें आती हैं। जब मामला अदालत में चलते रहता है, तब भी देश भर में मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे सरीखे आंदोलन चलता है, और लोग बाबरी मस्जिद को गिराकर उसकी र्इंटों को लेकर देश भर में अपने-अपने शहर लौटते हैं, और वहां उनका युद्ध-विजेता जैसा सम्मान होता है। छत्तीसगढ़ में अभी-अभी सरकार ने एक धर्मगुरू पर बरसों से चल रहे एक मामले को वापिस लिया है जिसमें पुलिस ने उसे एक निजी संपत्ति पर बलवे और कब्जे में शामिल पाया था। धर्म और संप्रदाय की ताकत को कहीं हिंसा करने के लिए, तो कहीं जुर्म को मंजूरी दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, और भारत में आस्था एक बहुत बड़ा हथियार हमेशा से ही रहा है। इस आस्था का इस्तेमाल करते हुए बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, और उसके बाद देश भर में दंगों और हिंसा में हजारों लोग मारे गए थे।
लोगों को याद होगा कि हरियाणा में ही एक संप्रदाय के रामपाल नाम के एक गुरू को गिरफ्तार करने जब पुलिस पहुंची थी, तो उसके पूरे डेरे को एक फौजी छावनी बना दिया गया था और कई दिनों तक पुलिस और भक्तों के बीच हथियारबंद संघर्ष की नौबत रही थी। लोगों को कुछ दशक पहले का अमरीका का एक वाकया याद हो तो वहां भी एक संप्रदाय बनाकर किले सरीखी फौजी हिफाजत में रह रहे एक विवादास्पद गुरू से निपटने के लिए जब आम हथियार कारगर नहीं रह गए थे तो फौजी हथियार और शायद टैंक भी लेकर जाना पड़ा था।
ऐसी तमाम घटनाओं को देखते हुए यह लगता है कि संप्रदायों के साथ, या कि धार्मिक-मुजरिमों के साथ जब तक सरकारें बहुत कड़ाई से  निपटना शुरू नहीं करेंगी, तब तक आस्था की ताकत को हथियार बनाकर संप्रदाय या धर्म के मुजरिम अपनी हरकतें जारी रखेंगे। ऐसे तनाव के मौके पर केंद्र और राज्य सरकारों को पूरी कड़ाई से, और पूरी तैयारी से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि यह कार्रवाई आगे भी ऐसे शक्तिप्रदर्शन का हौसला पस्त कर सके।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन बलराम जाखड़ और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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